Dec 1, 2008

किस तरह से तेरा शुक्रिया

किस तरह से तेरा शुक्रिया
अदा करूं ख़ुदा,
के तूने
बेतहाशा सर्द मौसम में बचने
नर्म धूप दीं
गर्म शालें दीं
सूखी लकडियाँ दीं...
आग दी
..
इतना महरबान हैं तो तू तो
...अब सर्दियां भी दे दे !!

RC
Dec 01, 4 pm

2 comments:

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

सर्दियाँ आ चुकी हैं मेमसाब...
पर लाइनें बेहतरीन...

RC said...

सही फरमाया आपने .. :-) ... अभी अभी तो दुआ की थी, कुबूल भी हो गयी !

कुछ और भी मांग लूं आज ? !!

:-)

RC