Dec 2, 2008

तेरा आना

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कैसा तो वक्त सरकता चला गया,
खुशनुमा धूप के टुकड़े की तरेह,
और मैं कोई भी तो सिरा न पकड़ सका !;
न मैं वक्त को मुट्ठी में जकड पाया,

और न ही तुझे रोक सका.

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