Dec 10, 2008

Its all about self-confidence .... !

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एक वो पल था जब .......

इतना आत्मविश्वास था उसे के
वो बेवफा हुआ पर
प्यार कम न हुआ

इतना आत्मविश्वास था उसे के
वो लाख बुरा हो फिर भी
उसकी लगन कम न हुई

इतना आत्मविश्वास था उसे के
अपना प्यार वो
ज़िंदगी भर निभाएगी

इतना आत्मविश्वास था उसे के
उसके जाने का गम
अब ज़िंदगी भर सह लेगी


इतना आत्मविश्वास था उसे के
लगा उसके इश्क में
नामुमकिन कुछ भी नहीं !
....
...
फिर एक पल आया जब उसे लगा
गर इतनी हिम्मत है निभाने की
गर इतनी ताक़त है सहने की
गर इतनी ही शिद्दत है उसमें
गर इतना ही विश्वास है ख़ुद पर .........

... तो उसे भुला भी तो सकती है !
:-)
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RC
Dec 10, 08
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9 comments:

गौतम राजरिशी said...

गर इतना विश्वास है खुद पर...

लेकिन क्या सचमुच उस वक्त इतना विश्वास रह पाता है अपने आप पर?

RC said...

पता नहीं गौतम जी, जिससे इस कविता की प्रेरणा मिली उससे पूछना होगा ! :-)
(वैसे मुझे लगता है औरत वैसे ही इतनी स्ट्रोंग होती है के ...

मानो अगर तो ज़िंदगी, उसके बिन कुछ भी नहीं
ठानो अगर तो ज़िंदगी में नामुमकिन कुछ भी नहीं !!

:-) ....)

RC

BrijmohanShrivastava said...

आत्मविश्वास की सर्वश्रेष्ठ रचना /काश इतना विश्वास ईश्वर के प्रति होता /बेवफा हुआ पर प्यार कम न हुआ पर निवेदन है कि धारणा ये रही होगी कि "" कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी ,,आदमी यूँ बेवफा नहीं होता ""बुरा है उस वाबत शायद सोचा होगा ""बुरा जो देखन में चला ......मुझसे बुरा न कोय ""जिन्दगी भर प्यार निभाने के लिए दृढ संकल्पित होना ==होना ही चाहिए /यही दर्शन है जाने के बाद गम जिंदगी भर सह लेना ( अब वो जाना चाहे नौकरी पर जाना हो ,विदेश जाना हो या फिर ...../ एक पुरानी फ़िल्म का गाना है "उतना ही उपकार समझ कोई जितना साथ निभादे ...कोई न संग मरे / अन्तिम लाइन ===तो भुला भी सकती है ==में तो मेडम बहुत ही गहरी बात हो गई /

RC said...

Brijmohan ji ..

हाँ मजबूरियों वाला शायद बेवफा नहीं होता
पर मजबूरियों का सबब हर दफा नहीं होता

Mera purana She'r hai :) Galati se yahan fot ho gaya !
RC

Rohit Tripathi said...

sundar kavita :-)

New Post :- एहसास अनजाना सा.....

डॉ .अनुराग said...

फिर एक पल आया जब उसे लगा
गर इतनी हिम्मत है निभाने की
गर इतनी ताक़त है सहने की
गर इतनी ही शिद्दत है उसमें
गर इतना ही विश्वास है ख़ुद पर .........

... तो उसे भुला भी तो सकती है !




जाने क्यों महेश भट्ट की "अर्थ "याद आ गयी

"SURE" said...

दिल में अगर हो लगन तो हर बात मुमकिन है, गैरों पे भरोसा किया तो अब ख़ुद को भी आजमा के देख .............
बहुत ही क्रन्तिकारी ख्याल ...औरत का एक शशक्त रूप ....बधाई

RC said...
This comment has been removed by the author.
अनुपम अग्रवाल said...

खुमार जी की कुछ लाइनें कहीं सुनी थीं ;
सुना है हमें वो भुलाने लगे हैं
तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं?