Dec 3, 2008

Some Ashaar

अपनी धुन में रहता हूँ
मैं भी तेरे जैसा हूँ

ओ पिछली रुत के साथी
अबके बरस फ़िर तनहा हूँ

मेरा दिया जलाए कौन
मैं तेरा खाली कमरा हूँ

1 comment:

BrijmohanShrivastava said...

यह गजल गुलाम अली साहेब की गाई हुई है /शायर का नाम आपने भी नहीं लिखा है /इसके एक दोशेर और होना चाहिए