That Coffee

ThatCoffee. Reloaded.
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*नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ...कॉफी का
तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का!

*एक उमीद रही है बाक़ी, एक सहारा जीने का
एक हवाला वादा तेरा, एक है वादा.. कॉफी का

*दुनिया भर का इश्क़ निचोड पड़ा था टेबल पर तनहा
लाली थी कोरों पर, आधा कप था छोड़ा ... कॉफी का

*सर्द था मौसम, बेकाबू मन, उसपर  कम्पन हाथों का
होंठों पर दस दिन लेकर मैं घूमा छाला कॉफी का

*उसके कप से कॉफी पीना खुशफहमी का बोसा था
जैसे रम का पेग मिला कर जाम बनाना कॉफी का

*उसके जाने पर मुझको बस ज़हर ने ज़िन्दा रक्खा है
एक सहारा सिगरेट का.. और एक है साला! कॉफी का

*आधी पी थी, हाथ से छलकी, दाग़ जो गहरा छोड़ गई
"उस कॉफी" की बात अलग थी, ज़ौक़ निराला कॉफी का

*होश-हवास शिथिल क्यों है, के आज समाअत^ धीमी है
रंग, लम्स, रस, गन्ध, नशा...लो नाम दुबारा कॉफी का!

~RC
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^समाअत- hearing
^लम्स-sense of touch
^रंग, लम्स, रस, गन्ध,समाअत -5 senses

Ishq...Again!

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दरमियां शक--वहम का इक दश्त है अभी
मिट्टी भी थोड़ी रूखी, कुछ सख्त है अभी
ये ऐतबार की दूरी, हो सिफर ये मुमकिन है
पर तुझसे मुहब्बत होने में ... वक्त है अभी

          मजधार वाले साहिल का भरम क्या करें
         दोहरा  के सिलसिला-ए-तलातुम क्या करें !!
          वो और बात थी जब तूफाँ से लड़ पड़े थे
          कश्ती पलट चुकी है, अब हम क्या करें !

लहरों पे बहते कश्ती के कुछ तख्त हैं अभी
हाँतुझसे मुहब्बत होने में .... वक़्त है अभी
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          इक दिल था इस जगह पर ज़ख्म-ओ-ग़मों से पहले
          पर जान जा चुकी है, तेरे मरहमों से पहले
          पानी का दाग़ वो सूखा आँखों के कोने पर ठहरा
          के मौत आई मुझको मेरे आसुओं से पहले

हाँ ! ज़ब्त उन तजरबों का, कमबख्त है अभी!
तनहाईयों से दिल की, हाँ ! रब्त है अभी
शायद कभी ये पिघले, पर सख्त है अभी

तुझसे मुहब्बत होने में .... वक्त है अभी

हाँ तुझसे मुहब्बत होने में .... वक्त है अभी ... !

30 July-4 Aug 2012

तो ऐसा ही होगा

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तेज़ ढलानों पर दौड़ोगे तो ऐसा ही होगा
बेख़ुद बेतरतीब चलोगे तो ऐसा ही होगा
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हल्की-सी टूटी माला, मोती  मीलों तक बिखरे
चिकनाई पर तुम फिसलोगे तो ऐसा ही होगा
*
दस बारी तामीर हुआ, ग्यारह  बारी ढहता है
ताश के घर में आह भरोगे तो ऐसा ही होगा
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हिस्सों में बांटा चेहरा कैसे पहचानूं ख़ुद को
टूटे शीशे को जोड़ोगे तो ऐसा ही होगा
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कड़वाहट, और कश पे कश, ये इश्क़ धुएं की घबराहट
"कॉफी" से गाथा पूछोगे तो ऐसा ही होगा

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