Dr. Rahat Indori
ये सर्द रातें भी बनकर अभी उड़ जायें
वो एक लिहाफ मैं ओढूँ तो सर्दियां उड़ जायें
ख़ुदा का शुक्र के मेरा मकान सलामत है
हैं इतनी तेज़ हवाएं के बस्तियाँ उड़ जायें
ज़मीन से एक त'आल्लुक ने बाँध रखा है
बदन में खून नहीं हो तो हड्डियां उड़ जायें
बिखर-बिखर सी गयी है किताब साँसों की
ये कागज़ात खुदा जाने कब कहाँ उड़ जायें
हवाएँ बाज़ कहाँ आतीं हैं शरारत से
सरों पे हाथ ना रखें तो पगड़ियाँ उड़ जायें
बहुत गरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जायें
Feb 26, 2012
Jan 4, 2012
माया - Maya, a tribute to Womanhood
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...
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माया
- Maya, a tribute to womanhood
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"Maaya" and "Anth" ... Two featured Poems on "The Browsing Corner" in December, 2011
http://www.thebrowsingcorner.com/poetry/hindi.html
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मुझे बता हे! मेरे विधाता
के तेरा अंश या अखंड हूँ मैं?
युगों-युगों के ये सिलसिले की
कड़ी हूँ कोई? या बंध हूँ मैं?
मैं तेरी लीला में तेरी साझी
नवीन रचना का स्पंद हूँ मैं
मैं तेरी शक्ति? या तेरी ऊर्जा ?
मैं तेरा शस्त्र हूँ? या स्कंध हूँ मैं?
या तेरी दुनिया को महका के भी
नज़र न आई, सुगंध हूँ मैं ?
मैं तेरी, तेरे वचन की पूरक
अर्धांगिनी मैं, हलन्त हूँ मैं ?!
मैं आत्मघाती कभी हूँ ज्वाला
विनम्र ज्योति सी मंद हूँ मैं
के आप ही से जो लड़ के हारी
मैं वो दुविधा, वो द्वंद्व हूँ मैं !?
मैं ही हूँ माया, यथार्थ भी मैं
कभी असुर हूँ, या संत हूँ मैं ?
के कुछ ना होकर भी पूर्ण हूँ मैं
मैं शून्य हूँ?.. या ..अनन्त हूँ मैं ?
---------------------------
RC,
8:00 AM EST, Oct 20, 2011
USA
Dedicated to the Butterfly who was the source of inspiration of this composition ....
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माया
- Maya, a tribute to womanhood
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"Maaya" and "Anth" ... Two featured Poems on "The Browsing Corner" in December, 2011
http://www.thebrowsingcorner.com/poetry/hindi.html
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मुझे बता हे! मेरे विधाता
के तेरा अंश या अखंड हूँ मैं?
युगों-युगों के ये सिलसिले की
कड़ी हूँ कोई? या बंध हूँ मैं?
मैं तेरी लीला में तेरी साझी
नवीन रचना का स्पंद हूँ मैं
मैं तेरी शक्ति? या तेरी ऊर्जा ?
मैं तेरा शस्त्र हूँ? या स्कंध हूँ मैं?
या तेरी दुनिया को महका के भी
नज़र न आई, सुगंध हूँ मैं ?
मैं तेरी, तेरे वचन की पूरक
अर्धांगिनी मैं, हलन्त हूँ मैं ?!
मैं आत्मघाती कभी हूँ ज्वाला
विनम्र ज्योति सी मंद हूँ मैं
के आप ही से जो लड़ के हारी
मैं वो दुविधा, वो द्वंद्व हूँ मैं !?
मैं ही हूँ माया, यथार्थ भी मैं
कभी असुर हूँ, या संत हूँ मैं ?
के कुछ ना होकर भी पूर्ण हूँ मैं
मैं शून्य हूँ?.. या ..अनन्त हूँ मैं ?
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RC,
8:00 AM EST, Oct 20, 2011
USA
Dedicated to the Butterfly who was the source of inspiration of this composition ....
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